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Kahan Tak Yeh Man Ko
Kishore Kumar
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🇮🇳 Hindi · Original
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कहाँ तक ये मन को अँधेरे छलेंगे
उदासी-भरे दिन कभी तो ढलेंगे
कहाँ तक ये मन को अँधेरे छलेंगे
उदासी-भरे दिन कभी तो ढलेंगे
कभी सुख, कभी दुख यही ज़िंदगी है
ये पतझड़ का मौसम घड़ी-दो-घड़ी है
ये पतझड़ का मौसम घड़ी-दो-घड़ी है
नए फूल कल फिर डगर में खिलेंगे
उदासी-भरे दिन कभी तो ढलेंगे
भले तेज़ कितना हवा का हो झोंका
मगर अपने मन में तू रख ये भरोसा
मगर अपने मन में तू रख ये भरोसा
जो बिछड़ें सफ़र में, तुझे फिर मिलेंगे
उदासी-भरे दिन कभी तो ढलेंगे
कहे कोई कुछ भी, मगर सच यही है
लहर प्यार की जो कहीं उठ रही है
लहर प्यार की जो कहीं उठ रही है
उसे एक दिन तो किनारे मिलेंगे
उदासी-भरे दिन कभी तो ढलेंगे
कहाँ तक ये मन को अँधेरे छलेंगे
उदासी-भरे दिन कभी तो ढलेंगे