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Shree Ram - Bharat Milap
Anup Jalota
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🇮🇳 Hindi · Original
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बड़ा ही करुण और अनुपम है ये दृश्य
भारत के जनमानस में आज तक उदाहरण बनकर अंकित है ये प्रसंग
जब भी भाई के प्रेम की बात चलती है तो कहा जाता है
"भाई हो तो भरत जैसा, प्रेम हो तो भरत जैसा"
राम चले संग सिय के, पीछे लक्ष्मण साथ
धरा हो गई धन्य जहाँ चरण धरें रघुनाथ
चरण धरें रघुनाथ
चित्रकूट पर्वत की देखी अनुपम सुंदरता अभिराम
कुटी बनाई लखन लाल ने, राम–सिया करते विश्राम
भरत को जब आते देखा तो लक्ष्मण मन उपजा संदेह
रघुवर कहें, "करो मत शंका, देखो भ्रात भरत का स्नेह"
चरण पकड़कर कहा भरत ने, "ये अन्याय किया क्यूँ, भ्रात?
वन जाना स्वीकार किया तो मुझको भी ले लेते साथ"
लेने आया हूँ मैं राघव, चले सँभाले अपना राज
है दुर्भाग्य, नहीं था तब मैं, आपको जब भेजा वनवास
राम ने कहा, "अयोध्या लौटो, करो अवध नगरी पर राज
मेरी ही छवि हो तुम, भाई, मेरा राज तुम्हारा राज"
फूट-फूटकर भरत रो पड़े, "ये कैसा आदेश है, तात"
भरत को गले लगाएँ रघुवर, लक्ष्मण देखे भरत मिलाप
चरण-पादुका राम की उठा धरी निज माथ
अवधपुरी लौटे भरत लिए पादुका साथ
सिंहासन रख पादुका, मन में रख रघुनाथ
राजकाज करते भरत, हुआ राम का राज
हुआ राम का राज
(जय हो भरतचंद्र की जय, अवधपति रामचंद्र की जय)
त्यागा मुकुट, जटाएँ बाँधी, काँधे पर सोहे धनु-वाण
वचन की मर्यादा रखने को वचन का धर्म निभाएँ राम
कठिन तपस्या का व्रत लेकर नदियाँ-पर्वत लाँघे राम
वल्कल पहन चले प्रभु आगे, पीछे सीता, लखन सुजान
कंद-मूल-फल खाएँ मग में, कुटिया में सो जाएँ राम
चरणों में कई शूल चुभे, पर मंद-मंद मुसकाएँ राम
कहीं कुटी में, कहीं विजन में, सहे शीत, बरखा और घाम
अवध सरीखी नगरी छोड़ी, वन-वन भटकें राजा राम
वन-वन भटकें राजा राम
(राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय-जय श्रीराम)
(राम-नाम भज, राम-राम भज, राम-नाम भज सीताराम)
(राम-नाम भज सीताराम)