Zulm
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शोर था जहाँ ऐक दिन वहाँ रह किऊन वीरान
रंग थे जहाँ ऐक दिन वहाँ किऊन बेरंगियाँ
सोच थी आज़ाद जो कभी कैद क्यू हुई हा
खो गया है वक़्त वो कहाँ ढूंड लें उसे यार
बड़ा मुश्किल है इस दुनिया
में दिल की रह पे चलना
उधर हैं खोफ़ के पहरे
उन्हें हैं तोड़ के चलना
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है
फिर देख खुदा क्या करता है
उठ बाँध कमर क्या डरता है
उठ बाँध कमर क्या डरता है
किऊन किसी की दौड़में चलें बेबसी है ये क्या
क्यों उभरता दर्द हम सहें सर्द हर लम्हा
वक़्त ये बाकी है जो अभी ढूंढ ले वही राह
रास्ता जो दिल का था कभी फिर से चल परें हन
अगर सुंली मेने इनकी
तो सारी ज़िंदगी मेरी
गुज़र जाए गी इश्स दर में
ना हो जाए रुसवाह कोई
इस ज़ुल्म सेलड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है
फिर देख खुदा क्या करता है
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है
चल छोटे तुम क्यू रोते
दिल में भरा जब जुनून तो कोई क्यू रोके
खो के पाया खुद को
अंदर शेयर की धार है
इश्स गले में कोई चैन नही काँटों के हार हैं
चाहत उंड़र हो जब उरनें को
तो मिलती बातें बोहोट सुनने को
ऐक कान से अंदर दूसरी तरफ से बहिर
यून एहसास ए कम तरी दौ मिनट में गायब आह
झाँक अंदर
सिलाहियात का बहता समंदर
हिम्मत अपनी झलके के बदन पे
रहते ज़ेह्नी सकूँ में मस्त कलंदर
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
झाँक अंदर
उठ बाँध कमर क्या डरता है
सिलाहियात का बहता समंदर
फिर देख खुदा काइया करता है
रहते ज़ेह्नी सकूँ में मस्त कलंदर
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है
इस ज़ुल्म से लड़ना है तो
उठ बाँध कमर क्या डरता है