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Shurpanakha Prasang
Anup Jalota
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🇮🇳 Hindi · Original
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अब यहाँ शूर्पणखा प्रसंग आता है
महाबली लंकापति रावण की बहन है शूर्पणखा
जब मानव देह धारण की है तो भगवान राम को भी
मानव जीवन की विपदाओं को भी झेलना पड़ता है
यहाँ पर विपदा एक सुंदर स्त्री का रूप धारण करके आई है
केवल बाहरी रूप के झाँसे में न आएँ
विपत्ति किसी भी रूप में आ सकती है
कर्मों का फल जान ले, किसका ऐसा ज्ञान
या तो विधना जानता, या फिर जानें राम
या फिर जानें राम
एक दिवस आई शूर्पणखा, देख राम तो जागी चाह
मोहित होकर कहा, "अप्सरा हूँ मैं, मुझसे करो विवाह"
राम ने कहा, "विवाहित हूँ मैं, मेरी पत्नी मेरे साथ
ये प्रस्ताव लखन भाई को दें, उस कुटिया में वे मात"
समझाने पर जब नहीं मानी, लक्ष्मण ने तब काटी नाक
अपमानित शूर्पणखा गरजी, "मेरे भाई राक्षसराज
बलशाली कितने खर-दूषण, तुमको अभी नहीं है बोध
शीश काटकर तुम दोनों का लेंगे वे मेरा प्रतिशोध"
सोने का पानी चढ़ने से पीतल का बदले नहीं मूल
रूपवती रमणी ने फिर से धारण किया राक्षसी खोल
बदल अप्सरा रूप को, धरा स्वयं का रूप
उतरा चोला झूठ का, प्रगटा सत्य स्वरूप
शूर्पणखा के रुदन से गूँजा राक्षस धाम
क्रोधित खर-दूषण कहें, "हमें बताओ नाम"
बोली कपट विचार कर, चली राक्षसी चाल
"करी प्रशंसा आपकी, किया मेरा यह हाल
किया मेरा यह हाल"
"एक प्रहर में राम-लखन को बाँध तुम्हें देंगे उपहार"
कहकर असुर उड़े वो दोनों, शूल से किया राम पर वार
कहा लखन ने, "इन असुरों को सौंपे मुझे, करे नहीं देर"
चार बाण मारे लक्ष्मण ने, हुए असुर खर-दूषण ढेर
भागी राक्षसी लंका पहुँची, जहाँ पे था रावण का राज
आर्तनाद कर बोली, "भाई, कट गई लंकापति की नाक"
कुपित बहन से पूछे रावण, "किसने किया तेरा ये हाल?
नाम बताओ उन दुष्टों का, खींचूँगा मैं उनकी खाल"
नाम सुना, गरजा लंकापति, "लूँगा मैं दोनों के प्राण
शेष आज जीवन दोनों का, कल होंगे दोनों निष्प्राण"
मायावी राक्षस मारीच को बुला कहे क्रोधी दशकंध
"राम-लखन का नाम मिटा दो, ज्ञात तुम्हें सारे छल-छंद"
मारीच डरा जानकर परिचय, "सन्मुख आएँगे श्रीराम
रावण के हाथों मरने से भला राम ही हर लें प्राण
भला राम ही हर लें प्राण"
राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय-जय श्रीराम
राम-नाम भज, राम-राम भज, राम-नाम भज सीताराम
राम नाम ही महानाम है, राम नाम का कर गुणगान
राम ना भूलो, राम ना छोड़ो, जब तक इस तन में है प्राण
जब तक इस तन में है प्राण