Dhadkan Dhadkan
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धड़कन, धड़कन बोले मेरा ये मन
टूटेंगे सब, जितने भी हैं बंधन
धड़कन, धड़कन बोले मेरा ये मन
टूटेंगे सब, जितने भी हैं बंधन
जितनी हो दूरी, जितनी मजबूरी, सब जंजीरें पिघला देगी ये मन की आंगन
धड़कन, धड़कन बोले मेरा ये मन
टूटेंगे सब, जितने भी हैं बंधन
जितनी हो दूरी, जितनी मजबूरी, सब जंजीरें पिघला देगी ये मन की आंगन
हो कांटे ही कांटे हैं राह में, पर चलता हूं तेरी चाह में
सौ अंधियारे ओढ़े रात है, कोई मगर कहता ये बात है
मन मन जलाले, कर दे उजाले
हाथों सजा ले जो है तेरे सपनों का भवन