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Leher

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लहर, लहर बहती हो के साहिल से बेख़बर ठहर, ओ, ठहर कर लम्हे कैसे बनते ये पहर? मिलते नहीं हम अगर मिलते नहीं हम अगर, ओ गीला हुआ जो तेरा बदन भीगा ना जाने क्यूँ मेरा मन यूँ तो ये नज़दीकियाँ दोनों की बेवजह भी हैं इनमें पर जितना तकल्लुफ़ है उतना मज़ा भी है हो, होती भला कैसे फीके सवेरे की नमकीन सी दोपहर? हो, मिलता हमें कैसे दिल के वीराने में सोया हुआ एक शहर? लहर, लहर बहती हो के साहिल से बेख़बर लहर, लहर कर लम्हे कैसे बनते ये पहर? मिलते नहीं हम अगर मिलते नहीं हम अगर मिलते नहीं हम अगर मिलते नहीं, ओ, हम अगर मुझे तुझ में, तुझे मुझ में तन्हा सा मिला हमसफ़र आ, छुपा लूँ तुझे मुझ में मिलें फिर ना मिलें हम अगर तेरा, तेरा, तेरा, तेरा मैं तेरा, तेरा, तेरा, तेरा मैं तेरा, तेरा, तेरा, तेरा मैं, ओ Whoa, चाहे टूटें सभी क़स्में पर अधूरा कोई अरमाँ ना रहे तेरा, तेरा मैं, ओ मिलते नहीं हम अगर मिलते नहीं हम अगर मिलते नहीं हम अगर मिलते नहीं हम अगर