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Aasman Ne (I)

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आसमान कहता है रब से, "तूने चाँद दो क्यूँ बनाए?" आसमान कहता है रब से, "तूने चाँद दो क्यूँ बनाए? एक में रखा है दाग़, दूसरा है साफ़-साफ़ सबकी नज़र उस पे जाए, हाय" वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है रब ने कहा, "ऐ आसमाँ उसे भेज के ज़मीं पे हम भी पछताए, हाय" वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है उसको देख फूलों को होती है जलन क्योंकि उसकी ख़ुशबू में हैं सभी मगन वो गुज़रे दूर से, हवा के शोर से उसके आने का पता चले, यहाँ सभी ये जानें आसमान कहता है रब से, "तूने चाँद दो क्यूँ बनाए?" आसमान कहता है रब से, "तूने चाँद दो क्यूँ बनाए?" सात रंग दुनिया में होते हैं, मगर आठवाँ कहाँ है, किसे है क्या ख़बर जो उसको देख ले वो पल में जान ले रंग क्यूँ करे है कोशिशें रंग एक बनाने? आसमान कहता है रब से, "तूने चाँद दो क्यूँ बनाए?" आसमान कहता है रब से, "तूने चाँद दो क्यूँ बनाए? एक में रखा है दाग़, दूसरा है साफ़-साफ़ सबकी नज़र उस पे जाए, हाय" वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है रब ने कहा, "ऐ आसमाँ उसे भेज के ज़मीं पे हम भी पछताए, हाय" वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है वही तो है, मेरी है वही तो कि जिसको देख-देख चाँद जलता है